भगवान श्रीकृष्ण ने जो गीता का ज्ञान अर्जुन को दिया था वह संदेश पूरे मानव जाति के लिए उपयोगी है। अगर हम श्रीमद्भगवत गीता के कुछ ज्ञान को हम अपने जीवन में आत्मसात करें तो कई कष्टों से मुक्ति मिल जाएगी। आप तनाव रहित जीवन का निर्वाह कर पाएंगे। यहाँ मै आप सबसे गीता के 10 महान उपदेश को साझा कर रहा हूँ जिसे सभी को अपनी जिंदगी में अपनाना चाहिए । ***************************************** वर्तमान का आनंद लो 1. बीते कल और आने वाले कल की चिंता नहीं करनी चाहिए, क्योंकि जो होना है वही होगा। जो होता है, अच्छा ही होता है, इसलिए वर्तमान का आनंद लो। ***************************************** आत्मभाव में रहना ही मुक्ति 2. नाम, पद, प्रतिष्ठा, संप्रदाय, धर्म, स्त्री या पुरुष हम नहीं हैं और न यह शरीर हम हैं। ये शरीर अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश से बना है और इसी में मिल जाएगा। लेकिन आत्मा स्थिर है और हम आत्मा हैं। आत्मा कभी न मरती है, न इसका जन्म है और न मृत्यु! आत्मभाव में रहना ही मुक्ति है। ***************************************** यहां सब बदलता है 3. परिवर्तन संसार का नियम है। यहां सब बदलता र...
संतुष्ट व्यक्ति सबसे सुखी होता है . एक गाँव में अर्नब नाम का एक व्यक्ति रहता था । उसके परिवार में माँ , बाप, पत्नी और दो बच्चे थे। उसका परिवार एक मध्यम वर्गीय था। वह एक सुलझा हुआ व्यक्ति था। वह किसी भी परिस्थिति में धैर्य नही खोता था। वह अपने बच्चों को भी धैर्यवान बनने की सीख देता था। वह अपने समय का सदुपयोग करता था और नियम-संयम का पालन करता था। वह ' आत्म - संतुष्टि ' की वकालत करता था । अर्नब के अनुसार जीवन में खुश रहने के लिए आत्म - संतुष्टि बहुत जरूरी है। आत्म - संतुष्टि आत्म विश्वास से आता है। जो व्यक्ति अपने - आप पर भरोसा रखता है वह हमेशा अच्छा कार्य करता है और अच्छा कार्य करने से उसे फल भी अच्छे मिलते हैं और यही से आत्म -संतुष्टि की शुरुआत होती है। अर्नब हमेशा मुस्कुराता रहता था और दूसरो को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करता था। अर्नब का मानना था कि जीवन में आत्म संतुष्टि बहुत जरूरी है । संतुष्ट व्यक्ति हमेशा खुश रहता है, वह जीवन के असली मायने को जानता है। जिसके जीवन में संतुष्टि नही है उसके जीवन में हमेशा परेशानियाँ ही रहती हैं। आत्म - संतुष्टि खुद की मेहनत से प्राप्त परि...
एकता में महान शक्ति होती है। एक गाँव में श्याम नाम का एक व्यक्ति रहता था और उसके चार बेटे थे । बड़े बेटे का नाम रजत , दूसरे बेटे का नाम रचित, तीसरे बेटे का नाम रोहित और सबसे छोटे बेटे का नाम रेहान था। बचपन में उनकी आपस में खुब जमती थी लेकिन जैसे - जैसे वे बड़े होने लगे तो उनके बीच अनबन होने लगी। अपने बच्चो का आपसी व्यवहार बदलता देख श्याम को बहुत चिन्ता होने लगी और उसे समझ में नही आ रहा था कि क्या किया जाए। एक दिन वह जंगल में घुमने गया और वहाँ उसकी नजर एक लकड़हारे पर पड़ती है जो लकड़ियाँ तोड़ रहा होता है। श्याम उसके पास जाता है और अपना नाम श्याम बता कर उसका परिचय पूछता है । लकड़हारा अपना नाम मोहन बताता है । दोनो में थोड़ी देर बात -चीत होती है उसके बाद मोहन अपने काम में लग जाता है। मोहन एक बड़े पेड़ से पतली - पतली टहनियाँ तोड़ कर और उसे छोटे - छोटे टुकड़ो में कर के गट्ठर बना रहा था। श्याम ने देखा कि जब मोहन पतली टहनियों को तोड़ता है तो वे बड़ी आसानी से टूट जाती हैं लेकिन जब दो या उससे अधिक टहनियों को तोड़ने का प्रयास करता है तो उसे मुश्किल होती है। श्याम को यह दृष्य दे...
Comments
Post a Comment